भारत स्वतन्त्र है ! हम नहीं !

भारत स्वतन्त्र है ! हम नहीं !

शायं साढ़े तीन बजे होगें। धूप कम होने लगी थी। घर में सभी अभी सो रहे थे। मैं बैठा-2 सोच रहा था कि क्या स्थिति होगी स्वतन्त्रता से पहले की, जब विदेशी लोग हमारे ऊपर शासन करते थे परतन्त्र थे हम। कुछ लोग जो उस समय के हैं उसके आधार पर कल्पना ही कर सकते हैं कि हमें कहाँ तक सफलता मिली। उस समय सब लोगों का एक मात्र उद्देश्य स्वराज्य प्राप्त करना था। आज हम स्वतन्त्र हैं। अचानक किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी।
मैनें उठकर दरवाजा खोला सामने डाकिया डाक लेकर खड़ा था। वह एक पत्र देकर चला गया। मैं पत्र खोलकर पढ़ने लगा-
प्रिय मित्र,
प्रणाम !
सर्व सहित स्वस्थानन्द होगें ही। पिछला पत्र मिला आपने लिखा था कि हम स्वतन्त्र हैं। यह सौभाग्य का विशय है। किन्तु आप ही बताओ क्या आप स्वतन्त्रता से कुछ भी कर सकते हो? अपना परिश्रम देश की उन्नति में लगा सकते हो? क्या आज भी सत्ता पर विदेशी माइन्डेड व्यक्ति नहीं बैठे हैं?क्या सही कार्य करने वाले को ही नहीं दबाया जा रहा?भ्रष्टाचारी व षड्यंत्र करने वालों का ही बचाव नहीं किया जाता?
मित्रवर भारत स्वतन्त्र है हम नहीं।

आपका एक मित्र